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Gold Reserve : RBI का 879 टन गोल्ड रिजर्व, भारत क्यों बढ़ा रहा है सोने का भंडार?

On: June 23, 2025 8:56 AM
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Gold Reserve
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 RBI का गोल्ड रिजर्व और भारत की आर्थिक ताकत

Gold Reserve : क्या आपने कभी सोचा कि भारत का केंद्रीय बैंक, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI), इतना सोना क्यों जमा कर रहा है? मार्च 2025 तक, RBI का Gold Reserve 879.59 टन की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है, जो पिछले साल के 822.1 टन से 7% अधिक है। यह वृद्धि न केवल भारत की आर्थिक रणनीति को दर्शाती है, बल्कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सोने की बढ़ती अहमियत को भी उजागर करती है। आइए, इस ब्लॉग में हम Gold Reserve की इस रिकॉर्ड वृद्धि के पीछे के कारण, इसके प्रभाव और भविष्य की संभावनाओं को विस्तार से समझते हैं।

RBI का Gold Reserve: एक नजर में

RBI ने वित्तीय वर्ष 2024-25 (FY25) में अपने Gold Reserve में 57.5 टन की वृद्धि की, जो पिछले सात वर्षों में दूसरी सबसे बड़ी वार्षिक वृद्धि है। मार्च 2025 तक, कुल Gold Reserve 879.59 टन हो गया, जिसमें से 511.99 टन भारत में, 348.62 टन बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) के पास, और 18.98 टन गोल्ड डिपॉजिट के रूप में रखा गया है। यह वृद्धि न केवल खरीदारी बल्कि सोने की कीमतों में 30% की वृद्धि और रुपये की वैल्यू में कमी के कारण भी हुई।

Gold Reserve का मूल्य मार्च 2024 के ₹2.74 लाख करोड़ से बढ़कर मार्च 2025 में ₹4.32 लाख करोड़ हो गया, जो 57.12% की वृद्धि दर्शाता है। यह सोने की कीमतों में उछाल और RBI की रणनीतिक खरीदारी का नतीजा है।

क्यों बढ़ रहा है RBI का Gold Reserve?

1. डॉलर की अस्थिरता के खिलाफ हेजिंग

वैश्विक स्तर पर डॉलर की अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनावों के बीच, सोना एक सुरक्षित और तटस्थ संपत्ति के रूप में उभरा है। जनवरी 2025 में डॉलर इंडेक्स 110 से नीचे 100 से कम हो गया, जिसने RBI को Gold Reserve बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। सोना न केवल मुद्रास्फीति के खिलाफ सुरक्षा देता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से भी बचाव करता है।

2. वैश्विक केंद्रीय बैंकों का रुझान

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के 2025 सर्वे के अनुसार, 43% केंद्रीय बैंक अगले 12 महीनों में अपने Gold Reserve में वृद्धि की योजना बना रहे हैं। पिछले तीन वर्षों में वैश्विक केंद्रीय बैंकों ने हर साल 1,000 टन से अधिक सोना खरीदा है। RBI भी इस वैश्विक रुझान का हिस्सा है, जो भारत की विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी को 9.32% (सितंबर 2024) से बढ़ाकर 11.7% (मार्च 2025) तक ले गया।

3. सोने की कीमतों में उछाल

2025 में सोने की कीमतों ने ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया, जो 13 जून 2025 को ₹1,00,000 प्रति 10 ग्राम और फिर ₹1,01,078 तक पहुंच गया। इस तेजी ने RBI के Gold Reserve के मूल्य को बढ़ाया, जिससे इसकी कुल विदेशी मुद्रा भंडार में हिस्सेदारी 12% हो गई।

4. देश में सोने की वापसी

RBI ने 2022 से 214 टन सोना विदेशी भंडारों से भारत वापस लाया है, जो 1991 की आर्थिक संकट के बाद सबसे बड़ा स्थानांतरण है। मार्च 2025 तक, 511.99 टन सोना भारत में संग्रहित है, जो कुल Gold Reserve का लगभग 58% है। यह कदम वैश्विक अनिश्चितताओं और विदेशी भंडारों पर निर्भरता कम करने की रणनीति को दर्शाता है।

भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

1. रुपये की स्थिरता

Gold Reserve की वृद्धि रुपये की वैश्विक भूमिका को मजबूत करती है। RBI अक्सर विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करता है, जैसे डॉलर बेचकर रुपये की अस्थिरता को नियंत्रित करना। सोना एक स्थिर संपत्ति के रूप में इस प्रक्रिया को समर्थन देता है।

2. विदेशी मुद्रा भंडार

मार्च 2025 तक, भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार $668.33 बिलियन था, जो सितंबर 2024 के $705.78 बिलियन से कम है। फिर भी, Gold Reserve की हिस्सेदारी बढ़ने से यह भंडार अधिक विविध और सुरक्षित हुआ है। यह 10.5 महीने के आयात और 96% बाहरी कर्ज को कवर करने के लिए पर्याप्त है।

3. मुद्रास्फीति के खिलाफ सुरक्षा

सोना मुद्रास्फीति के खिलाफ एक प्राकृतिक हेज है। 2025 में खाद्य मुद्रास्फीति में कमी और CPI के 4% लक्ष्य के नीचे रहने से RBI को आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में मदद मिली। Gold Reserve इस स्थिरता को और मजबूत करता है।

वैश्विक संदर्भ में भारत का स्थान

वैश्विक स्तर पर, भारत का Gold Reserve सातवां सबसे बड़ा है। अमेरिका (8,133 टन), जर्मनी (3,352 टन), और इटली (2,451 टन) जैसे देशों के मुकाबले भारत का भंडार कम है, लेकिन इसकी वृद्धि दर प्रभावशाली है। पिछले पांच वर्षों में, RBI ने अपने Gold Reserve को 35% बढ़ाया है, जो 2020 के 653 टन से 879.59 टन तक पहुंच गया।

भविष्य की संभावनाएं

2025 में सोने की कीमतों में और वृद्धि की संभावना है, खासकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों के कारण। WGC के सर्वे में 95% केंद्रीय बैंकों ने कहा कि अगले 12 महीनों में वैश्विक Gold Reserve बढ़ेगा। RBI की रणनीति इस रुझान के अनुरूप है, और यह संभव है कि भारत अपने Gold Reserve को 900 टन के पार ले जाए।

RBI का Gold Reserve 879.59 टन की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचना भारत की आर्थिक रणनीति में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल वैश्विक अनिश्चितताओं के खिलाफ एक सुरक्षा कवच प्रदान करता है, बल्कि रुपये की स्थिरता और विदेशी मुद्रा भंडार को भी मजबूत करता है। सोने की कीमतों में उछाल और RBI की रणनीतिक खरीदारी ने भारत को वैश्विक मंच पर और मजबूत किया है। क्या आप मानते हैं कि सोना भविष्य में और महत्वपूर्ण होगा? अपने विचार कमेंट्स में साझा करें!

Anand K.

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