Jyoti Global Plast IPO: शेयर बाजार में थोड़ा धमाल हो गया है, और आज हम बात करेंगे ज्योति ग्लोबल प्लास्ट आईपीओ की, जो NSE SME पर लिस्ट हुआ और पहले ही दिन लोअर सर्किट में चला गया। जी हां, ₹66 के इश्यू प्राइस पर लिस्टिंग हुई, लेकिन फिर शेयर नीचे गिरा और निवेशकों के चेहरे लटक गए। अगर तुम स्टॉक मार्केट के दीवाने हो या इस आईपीओ में पैसे लगाए थे, तो ये लेख तुम्हारे लिए है।
कंपनी का बैकग्राउंड: ज्योति ग्लोबल प्लास्ट कौन है?
ज्योति ग्लोबल प्लास्ट एक गुजरात बेस्ड कंपनी है, जो 2005 से प्लास्टिक और FRP (फाइबर रेनफोर्स्ड प्लास्टिक) प्रोडक्ट्स बनाती है। ये ऑटोमोटिव, इलेक्ट्रिकल, एग्रीकल्चर और कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री के लिए पार्ट्स सप्लाई करती है – जैसे वाटर टैंक्स, पाइप्स और इंडस्ट्रियल कंपोनेंट्स। कंपनी की फाइनेंशियल्स ठीक-ठाक हैं। FY25 में रेवेन्यू ₹93.80 करोड़ रहा, जो FY24 के ₹87.96 करोड़ से 7% ज्यादा है। प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) भी बढ़ा – FY24 में ₹3.62 करोड़ था, जो FY25 में ₹6.08 करोड़ हो गया। EBITDA मार्जिन 12.47% रहा, जो पिछले साल के 8.88% से बेहतर है। कंपनी का ऑर्डर बुक जुलाई 2025 तक ₹22.67 करोड़ का था, जो दिखाता है कि बिजनेस में दम है। ये डेटा कंपनी की RHP (Red Herring Prospectus) से लिया गया है, जो SEBI की वेबसाइट पर चेक कर सकते हो। कंपनी की प्रोडक्शन कैपेसिटी 5000 MT प्रति साल है, और वो 70% से ज्यादा यूज कर रही है, जो इंडस्ट्री में अच्छा साइन है।
आईपीओ की डिटेल्स: क्या था ऑफर?
ज्योति ग्लोबल प्लास्ट का आईपीओ ₹35.44 करोड़ का था, जिसमें फ्रेश इश्यू और ऑफर फॉर सेल (OFS) दोनों शामिल थे। प्राइस बैंड ₹62-66 प्रति शेयर था, और मिनिमम लॉट साइज 2000 शेयरों का। यानी, रिटेल निवेशक को कम से कम ₹1,32,000 लगाने थे। आईपीओ 4 अगस्त 2025 को खुला और 6 अगस्त को बंद हुआ। सब्सक्रिप्शन ठीक रहा – कुल 2.5 गुना से ज्यादा। रिटेल निवेशकों ने 3 गुना और नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) ने 2 गुना सब्सक्राइब किया। शेयर अलॉटमेंट 7 अगस्त को हुआ, और रिफंड 8 अगस्त को। Bigshare Services लीड मैनेजर और रजिस्ट्रार थे। कंपनी इस पैसे से नई फैसिलिटी, सोलर प्लांट और कर्ज चुकाने का प्लान कर रही है। ये डिटेल्स इकोनॉमिक टाइम्स और लाइवमिंट की रिपोर्ट्स से ली गई हैं।
लिस्टिंग का ड्रामा: क्यों लगा लोअर सर्किट?
10 अगस्त 2025 को ज्योति ग्लोबल प्लास्ट NSE SME पर लिस्ट हुआ। शेयर ₹65.90 पर खुला, जो इश्यू प्राइस ₹66 से बस थोड़ा नीचे था। लेकिन, ओपनिंग के बाद शेयर में भारी बिकवाली शुरू हुई, और वो 5% लोअर सर्किट यानी ₹62.61 पर अटक गया। ट्रेडिंग रुक गई, और निवेशकों के सपने चूर-चूर। ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) लिस्टिंग से पहले जीरो था, जो फ्लैट लिस्टिंग का hint दे रहा था। कुछ दिन पहले GMP ₹11 तक था, यानी 20% गेन की उम्मीद थी, लेकिन आखिरी समय में वो जीरो हो गया। NSE के डेटा के मुताबिक, लिस्टिंग डे पर वॉल्यूम कम था, और मार्केट सेंटीमेंट नेगेटिव रहा। रिटेल निवेशक जो लिस्टिंग गेन की उम्मीद में थे, वो निराश हो गए।
लोअर सर्किट के पीछे का गेम क्या था?
लोअर सर्किट लगने के पीछे कुछ बड़े कारण थे। पहला, मार्केट का मूड। अगस्त 2025 में ग्लोबल मार्केट्स में हलचल थी – यूएस में रिसेशन की अफवाहें और भारत में इकोनॉमिक स्लोडाउन की खबरें। SME सेगमेंट में हाल के कई आईपीओ, जैसे रेनॉल पॉलीकेम, फ्लैट या नेगेटिव लिस्ट हुए, जिससे निवेशक सतर्क थे। दूसरा, कंपनी की वैल्यूएशन। P/E रेशियो 18-20 था, जो प्लास्टिक इंडस्ट्री के एवरेज से थोड़ा ज्यादा था। इस इंडस्ट्री में रॉ मटेरियल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और कॉम्पिटिशन ज्यादा है, जो रिस्क बढ़ाता है। तीसरा, GMP का जीरो होना पहले ही फ्लैट लिस्टिंग का संकेत दे रहा था। मनीकंट्रोल और लाइवमिंट के एक्सपर्ट्स कहते हैं कि SME आईपीओ में रिटेल निवेशक ज्यादा होते हैं, और अगर लिस्टिंग गेन नहीं मिलता तो सेलिंग प्रेशर बढ़ जाता है।
निवेशकों की निराशा: क्या हुआ गलत?
जो निवेशक इस आईपीओ में कूदे, उनकी उम्मीदें GMP पर टिकी थीं। कुछ ने 15-20% गेन की सोची थी, लेकिन लोअर सर्किट ने सब गुड़-गोबर कर दिया। रेडिट और स्टॉक फोरम्स पर लोग अपनी भड़ास निकाल रहे हैं। कुछ का कहना है कि SME आईपीओ रिस्की होते हैं, और लिस्टिंग गेन के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए। लेकिन, दोस्तों, कंपनी की फंडामेंटल्स कमजोर नहीं हैं। रेवेन्यू और प्रॉफिट बढ़ रहे हैं, ऑर्डर बुक मजबूत है, और एक्सपेंशन प्लान्स अच्छे हैं। अगर मार्केट स्टेबल होता है, तो शेयर में रिकवरी की गुंजाइश है। मोतीलाल ओसवाल और बजाज फिनसर्व जैसे ब्रोकर्स सलाह देते हैं कि क्वार्टरली रिजल्ट्स पर नजर रखो और धैर्य रखो।
कंपनी का भविष्य: क्या है उम्मीद?
ज्योति ग्लोबल प्लास्ट की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। प्लास्टिक इंडस्ट्री भारत में 8-10% CAGR से बढ़ रही है, और कंपनी की प्रोडक्ट्स IS सर्टिफाइड हैं। नए सोलर प्लांट और फैसिलिटी से कॉस्ट कम होगा, जिससे प्रॉफिट मार्जिन बढ़ सकता है। FY25 में PAT मार्जिन 6.5% है, जो इंडस्ट्री एवरेज से बेहतर है। अगर कंपनी अपने ऑर्डर बुक को कैश में बदल पाए और एक्सपेंशन सक्सेसफुल रहा, तो शेयर की वैल्यू अनलॉक हो सकती है। लाइवमिंट के एनालिस्ट्स कहते हैं कि SME स्टॉक्स में 1-2 महीने का वेट करना चाहिए, क्योंकि लिक्विडिटी कम होने से शुरुआती वोलेटिलिटी ज्यादा होती है।
निवेशकों के लिए टिप्स
- रिसर्च करो: आईपीओ में अप्लाई करने से पहले कंपनी की फाइनेंशियल्स, इंडस्ट्री और मैनेजमेंट चेक करो।
- GMP पर भरोसा कम: ग्रे मार्केट प्रीमियम अनऑफिशियल होता है, और लिस्टिंग का सटीक इंडिकेटर नहीं है।
- लॉन्ग-टर्म सोचो: SME स्टॉक्स में रिस्क ज्यादा होता है, लेकिन अच्छी कंपनियों में धैर्य रिटर्न दे सकता है।
- डाइवर्सिफाई करो: सारे पैसे एक स्टॉक में मत लगाओ, रिस्क बांटो।
ज्योति ग्लोबल प्लास्ट आईपीओ की लिस्टिंग ने निवेशकों को निराश किया, लेकिन कंपनी की फंडामेंटल्स और इंडस्ट्री ग्रोथ में दम है। अगर तुमने शेयर लिए हैं, तो थोड़ा धैर्य रखो और क्वार्टरली रिजल्ट्स पर नजर रखो। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव तो चलते रहते हैं, लेकिन स्मार्ट निवेश जीत दिलाता है। क्या तुमने इस आईपीओ में अप्लाई किया था? अपनी स्टोरी कमेंट में बताओ! और हां, ज्यादा जानकारी के लिए NSE की वेबसाइट या अपने ब्रोकर से चेक करो।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है और निवेश सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश जोखिम भरा है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से संपर्क करें और स्वयं रिसर्च करें।










