Most Equal Country : वर्ल्ड बैंक की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने सामाजिक और आर्थिक समानता के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है। 2022 में भारत का गिनी इंडेक्स 25.5 रहा, जो इसे दुनिया का चौथा सबसे समान देश बनाता है। यह उपलब्धि स्लोवाक गणराज्य, स्लोवेनिया और बेलारूस के बाद भारत को इस सूची में शीर्ष स्थान देती है। आइए, इस उपलब्धि के पीछे की कहानी, इसके कारणों और भारत के लिए इसके महत्व को समझें।
गिनी इंडेक्स: समानता का पैमाना
Most Equal Country : गिनी इंडेक्स आय, धन या खपत के वितरण को मापने का एक वैश्विक मानक है, जहां 0 पूर्ण समानता और 100 पूर्ण असमानता को दर्शाता है। भारत का गिनी स्कोर 2011 में 28.8 से घटकर 2022 में 25.5 हो गया है, जो सामाजिक समानता की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह स्कोर भारत को चीन (35.7), अमेरिका (41.8) और सभी G7 व G20 देशों से अधिक समान बनाता है। केवल 30 देश ‘मध्यम निम्न’ असमानता श्रेणी (25-30) में आते हैं, जिनमें नॉर्वे, फिनलैंड और बेल्जियम जैसे मजबूत कल्याणकारी सिस्टम वाले देश शामिल हैं।
समानता के पीछे की रणनीति
भारत की इस उपलब्धि का श्रेय सरकार की समावेशी नीतियों और कल्याणकारी योजनाओं को जाता है। जन धन योजना, आधार और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) जैसी पहलों ने वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया है। आयुष्मान भारत योजना के तहत 41 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य कार्ड जारी किए गए, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान हुई। इसके अलावा, पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना ने 80 करोड़ लोगों को मुफ्त खाद्यान्न प्रदान किया, जिससे गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों की संख्या 2011-12 में 16.2% से घटकर 2022-23 में 2.3% हो गई। इन योजनाओं ने 171 मिलियन लोगों को अत्यधिक गरीबी से बाहर निकाला।
आर्थिक विकास और सामाजिक समानता का संतुलन
भारत ने न केवल आर्थिक विकास में तेजी दिखाई, बल्कि इसे सामाजिक समानता के साथ जोड़ा। वर्ल्ड बैंक की 2025 स्प्रिंग पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ के अनुसार, भारत की यह सफलता अन्य विकासशील देशों के लिए एक मॉडल है। स्टैंड-अप इंडिया और पीएम विश्वकर्मा योजना जैसी पहलों ने अल्पसंख्यकों और कारीगरों को सशक्त बनाया। भारत की यह रणनीति, जो प्रौद्योगिकी आधारित शासन और जमीनी स्तर पर कल्याणकारी पहुंच को जोड़ती है, ने इसे दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ-साथ समान समाज बनाया।
चुनौतियां और भविष्य की राह
हालांकि भारत ने प्रभावशाली प्रगति की है, कुछ आलोचक तर्क देते हैं कि अभी भी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में असमानता मौजूद है। X पर कुछ पोस्ट्स में यह सवाल उठाया गया कि 80 करोड़ लोग मुफ्त राशन पर निर्भर हैं, जो समानता के दावों पर सवाल उठाता है। फिर भी, भारत का गिनी स्कोर 167 देशों में से केवल तीन से पीछे है, जो इसकी उपलब्धि को और मजबूत करता है। वित्त मंत्रालय नई नीतियों पर काम कर रहा है ताकि गिनी इंडेक्स को और कम किया जा सके।
भारत का प्रेरणादायक मॉडल
भारत का दुनिया का चौथा सबसे समान देश बनना एक ऐसी उपलब्धि है जो आर्थिक विकास और सामाजिक समानता के संतुलन को दर्शाती है। यह न केवल भारत की विविधता और आकार को देखते हुए प्रभावशाली है, बल्कि वैश्विक स्तर पर अन्य देशों के लिए एक प्रेरणा भी है। क्या आप मानते हैं कि भारत की यह प्रगति अन्य देशों के लिए एक नक्शा तैयार कर सकती है? अपनी राय कमेंट्स में साझा करें और इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर गर्व करें














