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STEVE JOBS 2005 : महानता हासिल करने के 3 सुनहरे नियम

On: August 16, 2025 6:29 AM
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Steve Jobs
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STEVE JOBS , जिन्हें एप्पल और पिक्सार के सह-संस्थापक के रूप में जाना जाता है, ने 12 जून 2005 को स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के कमेंसमेंट समारोह में एक ऐसा भाषण दिया, जो आज भी दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रेरित करता है। इस भाषण में उन्होंने अपनी जिंदगी की तीन कहानियों के जरिए महानता हासिल करने के तीन सुनहरे नियम साझा किए। क्या आपने कभी सोचा कि एक कॉलेज ड्रॉपआउट, जिसे अपनी ही कंपनी से निकाल दिया गया, कैसे टेक्नोलॉजी और मनोरंजन की दुनिया का बादशाह बना? जॉब्स की ये कहानियां न केवल उनके अनुभवों का निचोड़ हैं, बल्कि जीवन की अनिश्चितताओं से निपटने और सपनों को हकीकत में बदलने की कला भी सिखाती हैं। इस ब्लॉग में, हम इन तीन नियमों को गहराई से समझेंगे, जो जॉब्स के व्यक्तिगत अनुभवों, चुनौतियों और दर्शन पर आधारित हैं।

STEVE JOBS : एक संक्षिप्त परिचय

स्टीव पॉल जॉब्स का जन्म 24 फरवरी 1955 को सैन फ्रांसिस्को, कैलिफोर्निया में हुआ था। गोद लिए गए बच्चे के रूप में पले-बढ़े जॉब्स ने अपनी जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव देखे। रीड कॉलेज में कुछ महीने पढ़ाई करने के बाद उन्होंने ड्रॉप आउट किया, लेकिन उनकी जिज्ञासा और सीखने की भूख ने उन्हें कभी नहीं छोड़ा। 1976 में, स्टीव वोज्नियाक के साथ मिलकर उन्होंने गैरेज में एप्पल की शुरुआत की, जो बाद में टेक्नोलॉजी की दुनिया में क्रांति लाई। पिक्सार को विश्व की अग्रणी एनिमेशन कंपनी बनाने और 1997 में एप्पल में वापसी कर iPod, iPhone और iPad जैसे इनोवेशन लाने वाले जॉब्स की कहानी असाधारण है। लेकिन 2005 का उनका स्टैनफोर्ड भाषण उनकी जिंदगी के दर्शन का सबसे शक्तिशाली सार है, जिसमें उन्होंने तीन कहानियों के माध्यम से जीवन के सबसे बड़े सबक साझा किए।

पहला सुनहरा नियम: डॉट्स को कनेक्ट करने पर भरोसा करें

STEVE JOBS की पहली कहानी उनके कॉलेज ड्रॉपआउट के अनुभव और जिंदगी में विश्वास की शक्ति के बारे में है। उन्होंने बताया कि रीड कॉलेज में छह महीने पढ़ाई करने के बाद उन्होंने औपचारिक शिक्षा छोड़ दी, क्योंकि उन्हें इसका मूल्य समझ नहीं आया। लेकिन ड्रॉपआउट होने के बाद भी वे 18 महीनों तक कॉलेज में ड्रॉप-इन करते रहे, उन क्लासेस में हिस्सा लेते जो उन्हें रोचक लगती थीं। इनमें से एक थी कैलीग्राफी क्लास, जहां उन्होंने टाइपोग्राफी, फॉन्ट डिजाइन और लेटर स्पेसिंग सीखा। उस समय यह बेकार लगता था, लेकिन दस साल बाद, जब वे मैकिंटोश कंप्यूटर डिजाइन कर रहे थे, तब यह ज्ञान काम आया। मैक दुनिया का पहला कंप्यूटर था जिसमें सुंदर टाइपोग्राफी थी, जिसने पर्सनल कंप्यूटिंग को नया आयाम दिया।

STEVE JOBS कहते हैं, “You can’t connect the dots looking forward; you can only connect them looking backwards.” इसका मतलब है कि भविष्य में चीजें कैसे जुड़ेंगी, यह पहले से नहीं पता। लेकिन आपको अपने गट, डेस्टिनी या कर्म पर भरोसा करना होगा। जॉब्स का यह नियम हमें सिखाता है कि जीवन की हर घटना, चाहे वह कितनी भी छोटी या असंबंधित लगे, भविष्य में महत्वपूर्ण हो सकती है। उदाहरण के लिए, अगर जॉब्स ने कैलीग्राफी नहीं सीखी होती, तो शायद मैक का डिजाइन वैसा नहीं होता, और एप्पल की सफलता की कहानी भी अलग होती। यह नियम हमें प्रेरित करता है कि अपनी जिज्ञासा का पीछा करें, नई चीजें सीखें, और विश्वास रखें कि सब कुछ एक दिन जुड़ जाएगा।

दूसरा सुनहरा नियम: जो प्यार करते हैं, उसे ढूंढें

STEVE JOBS की दूसरी कहानी प्यार, हार और पुनर्जनन के बारे में है। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने और स्टीव वोज्नियाक ने गैरेज में एप्पल शुरू किया, जो दस साल में 2 बिलियन डॉलर की कंपनी बन गई। लेकिन 30 साल की उम्र में, 1985 में, उन्हें अपनी ही कंपनी से निकाल दिया गया। यह उनके लिए सबसे बड़ा झटका था। जॉब्स ने कहा कि वे पूरी तरह टूट गए थे, लेकिन इस असफलता ने उन्हें और क्रिएटिव बनाया। उन्होंने नेक्स्ट और पिक्सार की शुरुआत की। पिक्सार ने “टॉय स्टोरी” जैसी क्रांतिकारी फिल्में बनाईं, और नेक्स्ट की टेक्नोलॉजी ने एप्पल को नया जीवन दिया जब जॉब्स 1997 में वापस लौटे।

STEVE JOBS कहते हैं, “You’ve got to find what you love.” आपका काम आपके जीवन का बड़ा हिस्सा है, और महान काम तभी संभव है जब आप उसे दिल से प्यार करें। अगर आपको अभी वह काम नहीं मिला जो आप प्यार करते हैं, तो खोजते रहें, सेटल न हों। यह नियम हमें सिखाता है कि असफलताएं अंत नहीं, बल्कि नए अवसरों की शुरुआत हो सकती हैं। जॉब्स की एप्पल से बर्खास्तगी ने उन्हें पिक्सार और नेक्स्ट बनाने का मौका दिया, जिसने उनकी जिंदगी को और समृद्ध किया। यह हमें प्रेरित करता है कि अपने जुनून को फॉलो करें, भले ही रास्ता कितना भी मुश्किल क्यों न हो।

तीसरा सुनहरा नियम: मौत को याद रखें और दिल की सुनें

जॉब्स की तीसरी कहानी सबसे गहरी और मार्मिक है – यह मौत के बारे में है। उन्होंने बताया कि 17 साल की उम्र में उन्होंने एक कोट पढ़ा: “If you live each day as if it was your last, someday you’ll most certainly be right.” इसने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। 2004 में जब उन्हें पैंक्रियाटिक कैंसर का पता चला, तब यह कोट और भी सार्थक हो गया। सर्जरी और रिकवरी के बाद, जॉब्स हर सुबह आईने में देखकर खुद से पूछते थे, “अगर आज मेरा आखिरी दिन हो, तो क्या मैं वही करूंगा जो करने जा रहा हूं?” अगर जवाब कई दिनों तक “नहीं” रहता, तो वे बदलाव करते।

STEVE JOBS कहते हैं कि मौत को याद रखना जीवन के सबसे बड़े फैसलों में मदद करता है। यह आपको बाहरी अपेक्षाओं, गर्व या डर के जाल से बचाता है। उनकी सलाह है, “Your time is limited, so don’t waste it living someone else’s life.” यह नियम हमें सिखाता है कि जीवन छोटा है, इसलिए अपने दिल की सुनें और वही करें जो आपको सही लगता है। जॉब्स ने अपने करियर में कई जोखिम लिए, जैसे iPhone लॉन्च करना, क्योंकि वे अपने विजन पर भरोसा करते थे। यह हमें प्रेरित करता है कि अपने सपनों को प्राथमिकता दें और दूसरों की राय से प्रभावित न हों।

STEVE JOBS के नियमों का जीवन में महत्व

STEVE JOBS के ये तीन नियम – डॉट्स पर भरोसा, प्यार ढूंढना, और मौत को याद रखना – केवल करियर तक सीमित नहीं हैं; ये जीवन के हर पहलू पर लागू होते हैं। पहले नियम से हम सीखते हैं कि अनिश्चितता में भी विश्वास बनाए रखें। दूसरा नियम हमें जुनून और उद्देश्य की तलाश करने की प्रेरणा देता है। तीसरा नियम हमें समय की कीमत और अपने दिल की आवाज सुनने का महत्व सिखाता है। ये नियम जॉब्स के व्यक्तिगत अनुभवों से निकले हैं, जो उनकी प्रामाणिकता और विश्वसनीयता को दर्शाते हैं।

जॉब्स का जीवन अपने आप में एक सबक है। कॉलेज ड्रॉपआउट होने से लेकर एप्पल को दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में से एक बनाने तक, उनकी यात्रा में कई असफलताएं और जीत शामिल थीं। 1985 में एप्पल से निकाले जाने के बाद, उन्होंने हार नहीं मानी। पिक्सार को एनिमेशन उद्योग का लीडर बनाया, और नेक्स्ट की टेक्नोलॉजी ने एप्पल की वापसी को संभव बनाया। उनकी कैंसर से लड़ाई और 2011 तक काम करने का जुनून उनकी दृढ़ता का प्रमाण है।

STEVE JOBS की विरासत और प्रेरणा

STEVE JOBS की विरासत केवल iPhone, iPad या मैक तक सीमित नहीं है। उनकी सोच ने टेक्नोलॉजी, डिजाइन और कहानी कहने की कला को नया आयाम दिया। उनके 2005 के भाषण का प्रभाव आज भी देखा जा सकता है, जो स्टूडेंट्स, प्रोफेशनल्स और उद्यमियों को प्रेरित करता है। जॉब्स का मशहूर मंत्र, “Stay Hungry. Stay Foolish,” हमें नई चीजें सीखने और जोखिम लेने के लिए प्रोत्साहित करता है। यह मंत्र हमें याद दिलाता है कि महानता हासिल करने के लिए हमें हमेशा भूखे (ज्ञान के लिए) और मूर्ख (रिस्क लेने के लिए) रहना होगा।

जॉब्स की कहानी हमें सिखाती है कि असफलताएं स्थायी नहीं होतीं। उनकी एप्पल से बर्खास्तगी, कैंसर से लड़ाई और फिर वापसी दिखाती है कि चुनौतियां हमें बेहतर बना सकती हैं। उनकी जिंदगी का एक और सबक है कि सादगी और फोकस ही असली ताकत है। एप्पल के प्रोडक्ट्स की डिजाइन में सादगी और यूजर-फ्रेंडली अप्रोच उनकी दूरदर्शिता का परिणाम थी।

इन नियमों को अपने जीवन में कैसे लागू करें?

STEVE JOBS के नियमों को लागू करना आसान नहीं है, लेकिन कुछ कदमों से शुरुआत की जा सकती है। सबसे पहले, अपनी जिज्ञासा को फॉलो करें। नई स्किल्स सीखें, भले ही वे तुरंत फायदेमंद न लगें। दूसरा, अपने काम में जुनून ढूंढें। अगर आपका वर्तमान काम आपको खुशी नहीं देता, तो नई संभावनाएं तलाशें। तीसरा, समय-समय पर अपने लक्ष्यों पर विचार करें और पूछें कि क्या आप वही कर रहे हैं जो आपके लिए सही है। छोटे-छोटे कदम, जैसे रोजाना 10 मिनट आत्ममंथन या नई हॉबी आजमाना, आपके जीवन को बदल सकते हैं।

महानता की ओर कदम

STEVE JOBS का 2005 का स्टैनफोर्ड भाषण एक रोडमैप है जो हमें महानता की ओर ले जाता है। उनके तीन सुनहरे नियम – डॉट्स पर भरोसा, प्यार ढूंढना, और मौत को याद रखना – हमें सिखाते हैं कि जीवन की अनिश्चितताओं में भी उद्देश्य और दिशा पाई जा सकती है। जॉब्स की जिंदगी, जिसमें असफलताएं, बीमारी और जबरदस्त वापसी शामिल है, हमें प्रेरित करती है कि कोई भी सपना असंभव नहीं है। यदि आप भी अपने जीवन में बदलाव चाहते हैं, तो इन नियमों को अपनाएं। अपने दिल की सुनें, जुनून का पीछा करें, और विश्वास रखें कि आपके डॉट्स एक दिन जरूर जुड़ेंगे।

यह लेख आपको प्रेरित करता है तो इसे शेयर करें। कमेंट में बताएं कि जॉब्स का कौन सा नियम आपको सबसे ज्यादा छूता है और आप इसे अपने जीवन में कैसे लागू करेंगे। क्या आप भी “Stay Hungry. Stay Foolish” के मंत्र को अपनाने के लिए तैयार हैं?

 

Anand K.

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