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Trump Tariffs : गिरते-बढ़ते टैरिफ, लेकिन जीडीपी ने दिखाया दमदार प्रदर्शन

On: August 30, 2025 3:30 PM
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Trump Tariffs (Photo:pinterest.com)
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Trump Tariffs : डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति, जिसे अक्सर “ट्रंप टैरिफ” के रूप में जाना जाता है, संयुक्त राज्य अमेरिका की व्यापार नीति का एक प्रमुख हिस्सा रही है। यह नीति मुख्य रूप से आयातित वस्तुओं पर उच्च शुल्क लगाने पर आधारित है, विशेष रूप से चीन, कनाडा और अन्य देशों से आने वाले उत्पादों पर। इसका उद्देश्य घरेलू उद्योगों की रक्षा करना, रोजगार सृजन करना और व्यापार घाटे को कम करना है। हालांकि, इस नीति का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ा है, विशेष रूप से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर। जीडीपी, जो किसी देश की आर्थिक उत्पादकता का मापदंड है, ट्रंप टैरिफ के सामने एक मुंहतोड़ जवाब के रूप में उभरा है, जहां कई अध्ययनों से पता चलता है कि ये टैरिफ आर्थिक विकास को बाधित करते हैं, मुद्रास्फीति बढ़ाते हैं और वैश्विक व्यापार को प्रभावित करते हैं। इस लेख में हम इस विषय पर गहन विश्लेषण करेंगे, जिसमें ट्रंप टैरिफ की पृष्ठभूमि, उनके जीडीपी पर प्रभाव, वैश्विक परिदृश्य और विशेषज्ञ मूल्यांकन शामिल होंगे।

ट्रंप प्रशासन के दौरान 2018 से शुरू हुई ये टैरिफ नीतियां 2025 में भी जारी हैं, जहां हालिया घोषणाओं में कनाडा पर 25% टैरिफ और अन्य देशों पर समान उपाय शामिल हैं। ये नीतियां न केवल अमेरिकी अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर जीडीपी में गिरावट का कारण बन रही हैं। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और अन्य संस्थाओं के अनुसार, इन टैरिफों का प्रभाव इतना गहरा है कि यह वैश्विक जीडीपी को 2 ट्रिलियन डॉलर तक प्रभावित कर सकता है। यह स्थिति जीडीपी के माध्यम से ट्रंप टैरिफ को एक करारा जवाब देती प्रतीत होती है, जहां आर्थिक संकेतक नीति की कमजोरियों को उजागर करते हैं।

Trump Tariffs की पृष्ठभूमि और उद्देश्य

ट्रंप टैरिफ की जड़ें अमेरिका की “अमेरिका फर्स्ट” नीति में हैं, जहां पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्यापार असंतुलन को सुधारने के लिए टैरिफ को एक हथियार के रूप में उपयोग किया। 2018 में स्टील और एल्यूमिनियम पर लगाए गए टैरिफ से शुरू होकर, यह नीति 2025 में और अधिक आक्रामक हो गई है। हाल ही में, ट्रंप ने कनाडा से आयात पर 25% टैरिफ की घोषणा की, जिसका प्रभाव कनाडाई अर्थव्यवस्था पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। इन टैरिफों का मुख्य उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है, लेकिन वास्तविकता में ये उपभोक्ताओं पर बोझ डालते हैं, क्योंकि आयातित सामानों की कीमतें बढ़ जाती हैं।

आर्थिक सिद्धांत के अनुसार, टैरिफ एक प्रकार का कर है जो आयात को महंगा बनाता है, जिससे घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन मिलता है। हालांकि, यह नीति वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित करती है। उदाहरण के लिए, अमेरिकी कंपनियां जो कनाडा या चीन से कच्चा माल आयात करती हैं, उन्हें उच्च लागत का सामना करना पड़ता है, जो अंततः उत्पाद की कीमतों में वृद्धि का कारण बनता है। ट्रंप का दावा है कि ये टैरिफ अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाते हैं, लेकिन कई अध्ययन इससे असहमत हैं। पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के व्हार्टन स्कूल ऑफ बिजनेस के बजट मॉडल के अनुसार, ट्रंप टैरिफ लंबे समय में अमेरिकी जीडीपी को 6% तक कम कर सकते हैं और मजदूरी को 5% तक प्रभावित कर सकते हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि जीडीपी ट्रंप टैरिफ की कमजोरियों का मुंहतोड़ जवाब दे रही है, जहां आर्थिक विकास की दर में गिरावट नीति की विफलता को प्रमाणित करती है।

अमेरिकी जीडीपी पर ट्रंप टैरिफ का प्रभाव

ट्रंप टैरिफ का सबसे प्रत्यक्ष प्रभाव अमेरिकी जीडीपी पर पड़ा है। विभिन्न मॉडलों से पता चलता है कि ये टैरिफ जीडीपी वृद्धि को 0.5% से 0.9% तक कम कर देते हैं। उदाहरण के लिए, 2025 की अप्रैल घोषणा के बाद, अमेरिकी जीडीपी में 0.5 प्रतिशत अंकों की कमी देखी गई, जो सभी 2025 टैरिफों से 0.9 प्रतिशत अंकों तक बढ़ सकती है। यह गिरावट मुख्य रूप से निर्यात में कमी, मुद्रास्फीति में वृद्धि और निवेशकों के विश्वास में कमी के कारण है।

जब टैरिफ लगाए जाते हैं, तो अमेरिकी उपभोक्ता और व्यवसाय उच्च कीमतों का सामना करते हैं। एक अध्ययन के अनुसार, ट्रंप प्रशासन के पहले कार्यकाल में लगाए गए टैरिफों का बोझ मुख्य रूप से अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ा, जिससे विशेष रूप से निम्न-आय वर्ग प्रभावित हुआ। 2025 में, यदि ये टैरिफ जारी रहते हैं, तो अमेरिकी जीडीपी में 1.6% की गिरावट हो सकती है, जो लगभग 467 बिलियन डॉलर के बराबर है। यह स्थिति जीडीपी के माध्यम से एक मुंहतोड़ जवाब है, क्योंकि आर्थिक संकेतक नीति की अप्रभावशीलता को उजागर करते हैं। निवेशक इन टैरिफों से दूर भागते हैं, जिससे पूंजी प्रवाह कम होता है और विकास दर प्रभावित होती है।

इसके अलावा, टैरिफ व्यापार युद्ध को जन्म देते हैं, जहां प्रभावित देश प्रतिक्रिया में अपने टैरिफ लगाते हैं। यह चक्र अमेरिकी निर्यात को प्रभावित करता है, जिससे जीडीपी में और कमी आती है। जे.पी. मॉर्गन के विश्लेषण के अनुसार, ट्रंप टैरिफ प्रस्तावों का आर्थिक प्रभाव इतना गहरा है कि यह उपभोक्ता विश्वास को कम करता है और विकास को बाधित करता है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था और जीडीपी पर प्रभाव

ट्रंप टैरिफ का प्रभाव केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है; यह वैश्विक स्तर पर जीडीपी को प्रभावित करता है। कनाडा का उदाहरण प्रमुख है, जहां 2025 की दूसरी तिमाही में जीडीपी में 1.6% की वार्षिक गिरावट दर्ज की गई, मुख्य रूप से ट्रंप टैरिफ के कारण। निर्यात में 26.8% की भारी गिरावट ने कनाडाई अर्थव्यवस्था को मंदी की ओर धकेल दिया। इसी प्रकार, आईएमएफ ने 2025 के लिए वैश्विक विकास अनुमान को कम कर दिया, विशेष रूप से धनी देशों के लिए, जहां अमेरिका को सबसे बड़ी गिरावट का सामना करना पड़ा।

भारत जैसे उभरते बाजारों पर भी प्रभाव पड़ा है। हालांकि, 2025 की अप्रैल-जून तिमाही में भारत की जीडीपी 7.8% बढ़ी, लेकिन ट्रंप टैरिफ का प्रभाव भविष्य में लूमिंग है, जो निर्यात को प्रभावित कर सकता है। वैश्विक स्तर पर, एक मॉडलिंग अध्ययन से पता चलता है कि ट्रंप टैरिफ अमेरिकी जीडीपी को 0.36% कम करते हैं, जो 108.2 बिलियन डॉलर के बराबर है। अधिकांश अर्थव्यवस्थाएं हारती हैं, विशेष रूप से अमेरिका, जहां प्रभाव अन्य देशों से अधिक है।

ये प्रभाव वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित करते हैं, जिससे उत्पादन लागत बढ़ती है और जीडीपी वृद्धि कम होती है। हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू के अनुसार, अधिकांश देशों के लिए जीडीपी वृद्धि में 0.2% से 0.6% की कमी संभावित है। यह वैश्विक जीडीपी को मुंहतोड़ जवाब के रूप में प्रस्तुत करता है, जहां टैरिफ नीति की वैश्विक अस्वीकृति आर्थिक संकेतकों से स्पष्ट है।

विशेषज्ञ मूल्यांकन

विशेषज्ञों का मत है कि ट्रंप टैरिफ अल्पकालिक लाभ प्रदान कर सकते हैं, लेकिन लंबे समय में हानिकारक हैं। येल बजट लैब के अनुसार, 2025 के सभी टैरिफों से अमेरिकी जीडीपी में 0.9% की कमी हो सकती है। आरबीसी और कांफ्रेंस बोर्ड जैसे संस्थानों ने भी चेतावनी दी है कि ये टैरिफ मुद्रास्फीति बढ़ाते हैं और आत्मविश्वास कम करते हैं।

निष्कर्ष में, ट्रंप टैरिफ को जीडीपी का मुंहतोड़ जवाब मिल रहा है, जहां आर्थिक विकास की गिरावट नीति की कमजोरियों को उजागर करती है। ये टैरिफ न केवल अमेरिकी अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर मंदी का कारण बनते हैं। नीति निर्माताओं को वैकल्पिक रणनीतियां अपनानी चाहिए, जैसे कि मुक्त व्यापार समझौते, ताकि जीडीपी वृद्धि को बढ़ावा मिले। अंततः, जीडीपी के आंकड़े दर्शाते हैं कि संरक्षणवाद की बजाय सहयोगपूर्ण व्यापार ही सतत विकास का मार्ग है।

Anand K.

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