Wang Yi Meets PM Modi : 19 अगस्त 2025 को नई दिल्ली में चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की, जो आगामी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन से पहले भारत और चीन के बीच कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब दोनों देश 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद से तनावपूर्ण संबंधों को सामान्य करने की दिशा में प्रयासरत हैं। वांग यी ने इस मुलाकात के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ओर से SCO शिखर सम्मेलन के लिए एक संदेश और निमंत्रण पत्र सौंपा, जिसे पीएम मोदी ने स्वीकार किया। यह लेख इस मुलाकात के महत्व, भारत-चीन संबंधों की वर्तमान स्थिति, और SCO शिखर सम्मेलन के संदर्भ में दोनों देशों की कूटनीतिक रणनीति पर प्रकाश डालेगा।
मुलाकात का पृष्ठभूमि और महत्व
वांग यी की यह भारत यात्रा, जो 18-19 अगस्त 2025 को हुई, तीन साल बाद उनकी पहली भारत यात्रा थी। इस दौरान उन्होंने न केवल पीएम मोदी से मुलाकात की, बल्कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल के साथ भी व्यापक चर्चा की। यह मुलाकात SCO शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हुई, जो 31 अगस्त से 1 सितंबर 2025 तक चीन के तियानजिन शहर में आयोजित होने वाला है। इस सम्मेलन में पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय वार्ता की उम्मीद है, जो दोनों देशों के बीच संबंधों को और बेहतर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
वांग यी ने पीएम मोदी को शी जिनपिंग का एक व्यक्तिगत संदेश सौंपा और SCO शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए औपचारिक निमंत्रण दिया। पीएम मोदी ने इस निमंत्रण को स्वीकार करते हुए चीन की SCO अध्यक्षता के लिए समर्थन व्यक्त किया और तियानजिन में शी जिनपिंग से मुलाकात की अपनी उत्सुकता जताई। इस मुलाकात में भारत-चीन सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने, साथ ही सीमा विवाद के निष्पक्ष, तर्कसंगत और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान पर जोर दिया गया।
भारत-चीन संबंधों में प्रगति
पिछले साल अक्टूबर में रूस के कजान में BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद से भारत-चीन संबंधों में लगातार प्रगति देखी गई है। इस मुलाकात के बाद दोनों देशों ने कई द्विपक्षीय तंत्रों को पुनर्जनन करने का फैसला किया था, जिसमें सीमा विवाद को हल करने के लिए विशेष प्रतिनिधि (SR) वार्ता और अन्य कूटनीतिक चैनल शामिल हैं। इस संदर्भ में, वांग यी ने जयशंकर और डोभाल के साथ अपनी हालिया बैठकों के सकारात्मक परिणामों पर प्रकाश डाला, विशेष रूप से 24वें विशेष प्रतिनिधि वार्ता में अजित डोभाल के साथ हुई चर्चा को।
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अनुसार, पीएम मोदी ने पिछले साल कजान में शी जिनपिंग के साथ अपनी मुलाकात के बाद से द्विपक्षीय संबंधों में स्थिर और सकारात्मक प्रगति का स्वागत किया। इस प्रगति में कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली, सीमा पर तनाव कम करने के लिए सैन्य वापसी, और लोग-से-लोग संपर्क को बढ़ावा देना शामिल है। पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “वांग यी से मिलकर खुशी हुई। कजान में राष्ट्रपति शी के साथ मेरी मुलाकात के बाद से, भारत-चीन संबंधों में एक-दूसरे के हितों और संवेदनशीलता के सम्मान के साथ स्थिर प्रगति हुई है। मैं तियानजिन में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान हमारी अगली मुलाकात का इंतजार कर रहा हूं।”
SCO शिखर सम्मेलन का महत्व
SCO एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय संगठन है, जिसमें भारत और चीन दोनों सक्रिय सदस्य हैं। यह संगठन क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जैसे मुद्दों पर सहयोग को बढ़ावा देता है। 2025 का SCO शिखर सम्मेलन चीन की अध्यक्षता में आयोजित हो रहा है, और यह भारत-चीन संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है। इस शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच होने वाली संभावित मुलाकात दोनों देशों के बीच सीमा विवाद, व्यापार, और क्षेत्रीय सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर होगी।
इसके अलावा, SCO शिखर सम्मेलन में भारत और रूस के बीच भी द्विपक्षीय वार्ता की संभावना है, क्योंकि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी इस सम्मेलन में भाग लेंगे। यह भारत के लिए अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को प्रदर्शित करने और वैश्विक भू-राजनीति में संतुलन बनाए रखने का एक अवसर होगा।
सीमा विवाद और शांति की दिशा में प्रगति
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद, विशेष रूप से लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर तनाव, लंबे समय से दोनों देशों के बीच तनाव का प्रमुख कारण रहा है। 2020 के गलवान घाटी संघर्ष ने संबंधों को गंभीर रूप से प्रभावित किया था, जिसके बाद दोनों देशों ने LAC पर 50,000 से 60,000 सैनिकों को तैनात किया था। हालांकि, कजान में पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद दोनों पक्षों ने सैन्य वापसी पर सहमति जताई थी, जिसके परिणामस्वरूप LAC पर स्थिति में सुधार हुआ है।
वांग यी ने अपनी दिल्ली यात्रा के दौरान कहा कि दोनों पक्षों को “रणनीतिक संचार के माध्यम से आपसी विश्वास बढ़ाना चाहिए, आदान-प्रदान और सहयोग के माध्यम से सामान्य हितों का विस्तार करना चाहिए, और सीमा पर विशिष्ट मुद्दों को ठीक करने की दिशा में काम करना चाहिए।” उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सीमा पर अब स्थिरता बहाल हो गई है, जो द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है।
आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग
वांग यी की यात्रा के दौरान आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग पर भी चर्चा हुई। जयशंकर ने अपनी मुलाकात में व्यापार, तीर्थयात्रा, और लोग-से-लोग संपर्क जैसे मुद्दों पर जोर दिया। भारत ने हाल ही में चीनी नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा फिर से शुरू किया है, जो गलवान संघर्ष के बाद से निलंबित था। इसके अलावा, चीन ने भारत की तीन प्रमुख मांगों— दुर्लभ पृथ्वी खनिज, उर्वरक, और टनल बोरिंग मशीनों की आपूर्ति को फिर से शुरू करने का वादा किया है।
दोनों देशों ने कनेक्टिविटी, सीमा व्यापार, और नदी डेटा साझा करने जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की भी बात की। कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली को दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक कूटनीति के पुनरुद्धार के रूप में देखा जा रहा है। पीएम मोदी ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि यह दोनों देशों के बीच लोगों के बीच संपर्क को मजबूत करेगा।
वैश्विक संदर्भ और चुनौतियां
वांग यी की यात्रा का समय वैश्विक भू-राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत और चीन दोनों पर 50% शुल्क लगाने की घोषणा की है, जिसमें भारत पर रूसी तेल खरीद के लिए अतिरिक्त 25% शुल्क शामिल है। इसने भारत और चीन को एक साथ आने के लिए प्रेरित किया है, क्योंकि दोनों देश अमेरिकी व्यापार नीतियों से प्रभावित हो रहे हैं। जयशंकर ने अपनी मुलाकात में वांग यी से कहा कि भारत और चीन को “खुली और रचनात्मक” दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, जो आपसी सम्मान, संवेदनशीलता और हितों पर आधारित हो।
वांग यी की पीएम मोदी से मुलाकात और SCO शिखर सम्मेलन से पहले भारत-चीन कूटनीति में आई तेजी दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। यह मुलाकात न केवल सीमा विवाद को हल करने और शांति बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि आर्थिक, सांस्कृतिक और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भी एक मंच प्रदान करती है। SCO शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी और शी जिनपिंग की प्रस्तावित मुलाकात दोनों देशों के लिए एक नई शुरुआत का अवसर हो सकती है। जैसे-जैसे भारत और चीन अपने संबंधों को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वे वैश्विक चुनौतियों और आपसी हितों को कैसे संतुलित करते हैं।















